Bhediya Aur Gadha | The Donkey Who Outsmarted a Hungry Wolf
About this video
The donkey looks up from the river to find a hungry wolf only a few steps away.
Bhediya Aur Gadha follows a donkey who invents a thorn in his hoof to escape a hungry wolf beside a quiet river.
A donkey is drinking at a sunny riverbank when a hungry wolf approaches. The other animals hear him and hurry away, but the donkey keeps drinking. By the time he lifts his head, the wolf is only a few steps away. Running at once would give the wolf an easy chance, so the donkey takes a moment to think.
He begins to limp and pretends that a sharp thorn is stuck in his back foot. He asks the wolf to remove it first, claiming that the thorn might otherwise hurt the wolf while he eats. The wolf believes the story. Eager for an easy meal, he bends closer to inspect the hoof and forgets to watch the animal standing in front of him.
The donkey stays still until the wolf is close enough. Then one sudden backward kick gives him the opening he needs. While the startled wolf struggles in the dust, the donkey runs along the safe path. Later, among the other animals, he explains that he felt afraid too, but paused to understand the danger before choosing his moment.
This Hindi moral story follows both sides of that encounter: the donkey keeps thinking under pressure, while greed pulls the wolf away from his goal. The closing lesson warns against losing focus near a goal because of someone else's words. Watch the wolf's attention shift, and notice how the donkey turns that distraction into a way out.
Chapters
0:00 Danger at the River
1:12 The Donkey Thinks
1:26 The Invented Thorn
2:09 The Wolf Takes Bait
2:39 Inspecting the Hoof
3:25 One Sudden Kick
4:17 Safety and the Lesson
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Hindi transcript
The narration as spoken, from the caption track uploaded with this video.
- 0:04.101 शांत नदी किनारे एक गधा पानी पी रहा था, तभी भूखा भेड़िया चुपचाप उसके बहुत पास आ पहुँचा।
- 0:11.143 सुबह की धूप पानी पर चमक रही थी, और कई छोटे-बड़े जानवर अपनी प्यास बुझाने किनारे जमा थे।
- 0:18.184 किसी को आने वाले संकट का आभास नहीं था; सब अपने परिचित घाट पर निश्चिंत होकर पानी पी रहे थे।
- 0:25.729 झाड़ियों की ओट से भेड़िया नदी की ओर बढ़ा। भूख ने उसकी नजर सीधे किनारे के जानवरों पर टिका दी।
- 0:32.771 उसकी आहट पहचानते ही सारे जानवर घबराकर तुरंत अपने-अपने घरों और सुरक्षित रास्तों की ओर भाग निकले।
- 0:40.813 पर गधा पानी पीने में इतना मग्न था कि उसने भागते खुरों की आवाज और उठती धूल पर ध्यान नहीं दिया।
- 0:48.854 कुछ ही क्षण में चहल-पहल वाला किनारा सूना हो गया, मगर गधे ने सिर झुकाए अपनी प्यास बुझाना जारी रखा।
- 0:57.896 भेड़िया अब खुले किनारे पर आ चुका था। सामने अकेले गधे को देखकर उसकी चाल और भी तेज हो गई।
- 1:04.938 जब गधे ने आखिर सिर उठाया, तो भेड़िया बस कुछ कदम दूर था और उसकी भूखी नजर उसी पर जमी थी।
- 1:12.354 भागने का रास्ता खुला था, पर दूरी इतनी कम थी कि घबराकर दौड़ना भेड़िए को मौका देना होता।
- 1:18.395 गधे ने डर को दबाया, एक पल सोचा और बचने के लिए अपने पिछले पैर से लँगड़ाने का नाटक शुरू किया।
- 1:26.915 गधे की बदली चाल देखकर भेड़िया ठिठक गया। उसे लगा कि आसान शिकार के पैर में कोई गहरी परेशानी है।
- 1:34.507 अरे गधे, तुम इस तरह लँगड़ा क्यों रहे हो? अभी तक तो नदी किनारे बिल्कुल ठीक खड़े दिखाई दे रहे थे।
- 1:41.549 गधे ने दर्द भरा चेहरा बनाया, पिछले पैर को धीरे से ऊपर रखा और कराहने जैसा अभिनय करने लगा।
- 1:49.591 भेड़िया भाई, मेरे पिछले पैर में एक नुकीला काँटा चुभ गया है और हर कदम पर बहुत तकलीफ हो रही है।
- 1:56.632 कृपया पहले वह काँटा निकाल दीजिए, फिर आप मुझे बिना किसी परेशानी के आसानी से खा सकेंगे।
- 2:02.674 अगर काँटा पैर में रह गया, तो खाते समय वह आपके गले में फँस सकता है और आपको बहुत दर्द देगा।
- 2:09.549 गधे की बात सुनकर भेड़िए के मुँह में पानी आ गया। लालच ने उसके मन की सारी सावधानी पीछे कर दी।
- 2:17.591 उसने सोचा कि काँटा निकाल देने से भोजन आसान होगा और बाद में किसी परेशानी का डर भी नहीं रहेगा।
- 2:24.132 ठीक है, पिछला पैर ऊपर करो। मैं काँटा निकाल देता हूँ, फिर तुम्हें भागने का कोई मौका नहीं मिलेगा।
- 2:31.173 गधे ने आज्ञाकारी बनने का अभिनय किया और धीरे-धीरे ऐसा मुड़ा कि उसका पिछला पैर भेड़िए की ओर हो गया।
- 2:39.215 भेड़िया उसके चारों ओर घूमकर पीछे पहुँचा, फिर जमीन के पास झुककर खुर और पैर को गौर से देखने लगा।
- 2:47.257 उसे कोई काँटा दिखाई नहीं दिया, इसलिए वह और पास आया और पूरी एकाग्रता से बालों के बीच खोजने लगा।
- 2:55.007 भेड़िए की आँखें अब केवल गधे के पैर पर थीं। वह अपने सामने खड़े जानवर की चाल बिल्कुल भूल चुका था।
- 3:02.691 गधे ने सावधानी से गर्दन मोड़कर देखा कि भेड़िए का सिर ठीक उसके पिछले खुर के पास आ चुका है।
- 3:09.732 उसने साँस थाम ली, शरीर का भार अगले पैरों पर रखा और सही क्षण आने तक खुद को शांत बनाए रखा।
- 3:17.774 भेड़िया थोड़ा और झुका। गधे को वही मौका मिल गया, जिसकी प्रतीक्षा में उसने यह सारा नाटक रचा था।
- 3:25.816 अचानक गधे का पिछला पैर जोर से पीछे गया और उसकी दुलत्ती सीधे भेड़िए के मुँह और सिर पर पड़ी।
- 3:33.857 भेड़िया सँभल नहीं पाया। वह धूल उड़ाता हुआ दूर जा गिरा और कुछ क्षण वहीं चक्कर खाकर पड़ा रहा।
- 3:41.899 झटके से भेड़िए का सिर घूम रहा था; उसे समझ नहीं आया कि पल भर में उसके साथ क्या हो गया।
- 3:48.482 गधे ने पीछे देखने में समय नहीं गँवाया। वह तुरंत सँभला और तेजी से सुरक्षित रास्ते पर दौड़ पड़ा।
- 3:55.524 दूर छिपे जानवरों ने गधे को दौड़ते देखा, तो वे समझ गए कि उसने अपनी सूझ-बूझ से रास्ता बना लिया है।
- 4:03.565 भेड़िया उठने की कोशिश करता रहा, लेकिन चकराते सिर और उड़ती धूल ने उसके कदम लड़खड़ा दिए।
- 4:10.607 जब उसकी समझ लौटी, तब तक गधा बहुत दूर निकल चुका था और नदी का किनारा फिर से खाली था।
- 4:17.649 सुरक्षित स्थान पर पहुँचकर गधे ने राहत की साँस ली। थोड़ी देर बाद बाकी जानवर भी उसके पास लौट आए।
- 4:25.287 सबने पूछा कि इतने पास खड़े भेड़िए से वह कैसे बच निकला, क्योंकि भागने के लिए समय बहुत कम था।
- 4:32.328 डर मुझे भी लगा, पर घबराकर दौड़ता तो वह पकड़ लेता; इसलिए मैंने पहले सोचने का समय लिया।
- 4:39.37 मैंने उसकी भूख और लालच को समझा, काँटे की बात बनाई और सही मौका मिलते ही वहाँ से निकल आया।
- 4:46.412 गधे की सूझ-बूझ ने उसे बचाया, जबकि भेड़िए का लालच और भटका ध्यान उसके लक्ष्य की राह में बाधा बन गए।
- 4:55.453 कहानी की साफ और सच्ची सीख यही है: लक्ष्य के पास पहुंचकर दूसरों की बातों पर ध्यान मत दो।