Budha Giddh Aur Billi | The Old Vulture and the Cat
About this video
Budha Giddh Aur Billi: an old vulture finds shelter, a cunning cat wins his trust, and hasty blame falls on the wrong bird.
Budha Giddh Aur Billi is a Hindi folk tale about an old vulture, a cunning cat and a banyan tree full of nestlings. On a quiet evening a tired vulture lands on the tallest dry branch by the river. The birds are afraid of the stranger, but his trembling voice and bowed wings turn their fear into pity. The community offers him a hollow to live in on one condition: every nest and every chick stays his responsibility.
For months he keeps his word. He guards the nests, shelters the chicks from storms and tells them old forest stories, until the whole tree trusts him. Then a wandering cat arrives at the roots and asks only for a place to rest. The vulture sets strict limits, the cat accepts every one, and with polite words and daily bows she slowly makes everyone stop watching her.
This retelling follows what happens when sweet words replace careful watching. Nestlings begin to disappear, the cat slips away in the night, and grieving birds find a sign among the roots and decide in a single moment who must be guilty. Nobody stops to ask a question, and the one who guarded the tree for months pays for a crime he never knew about.
Content note: this is a dark folk tale with a sad ending. A predator takes nestlings and an innocent character is harmed. It is told in Hindi narration in a storybook animation style for viewers who enjoy classic moral fables. Viewers also search for it as budhe giddh ki kahani or the budha gidh story.
Two lessons stay with the tale: do not trust a stranger on sweet words alone, and do not punish anyone before you have asked for the truth. Which of the two do you think the birds missed first? Tell us in the comments, then watch the three Shorts from KiddoTunes Studio for the key moments.
Chapters
0:00 A Stranger at the Banyan
0:44 The Old Vulture's Plea
1:24 Months of Quiet Trust
2:04 The Cat Arrives
2:42 Sweet Words Win Trust
3:19 The Chicks Go Missing
4:40 The Cat Slips Away
5:19 Grief Turns to Blame
6:05 The Hard Lesson
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Story guide
The Old Vulture and the Cat: A Hard Folk Tale About Trust and Hasty Blame
Hindi transcript
The narration as spoken, from the caption track uploaded with this video.
- 0:04.1 नदी किनारे विशाल बरगद पर बूढ़ा गिद्ध आश्रय चाहता था, पर वहाँ एक बड़ा छल आने वाला था।
- 0:11.142 उसकी घनी डालियों में अनेक पक्षियों के घोंसले थे, और सब परिवार मिल-जुलकर रहते थे।
- 0:17.183 एक शाम थका हुआ बूढ़ा गिद्ध भटकते-भटकते आया और सबसे ऊँची सूखी डाल पर बैठ गया।
- 0:23.614 अनजान गिद्ध को देखते ही पक्षी घबरा गए और सभी अपने बच्चों के चारों ओर जमा हो गए।
- 0:29.656 यह पेड़ हमारे बच्चों का घर है। कृपया अभी यहाँ से चले जाइए और कहीं दूसरी जगह रहिए।
- 0:36.698 कठोर शब्द सुनकर गिद्ध ने सिर झुकाया, पंख समेटे और विनम्र होकर अपनी बात कहने लगा।
- 0:44.739 मैं बहुत बूढ़ा हूँ। दूर जंगल से पानी तक उड़ना कठिन है, इसलिए बस थोड़ी जगह चाहता हूँ।
- 0:51.781 विश्वास कीजिए, मैं किसी को हानि नहीं पहुँचाऊँगा और आपकी अनुपस्थिति में बच्चे सँभालूँगा।
- 0:57.823 उसकी काँपती आवाज और झुके पंख देखकर पक्षियों का भय धीरे-धीरे दया में बदलने लगा।
- 1:04.364 सबने आपस में विचार किया कि असहाय वृद्ध को आश्रय देना उनके साझा धर्म का काम था।
- 1:11.405 आप ऊपरी खोखल में रह सकते हैं, पर हर घोंसला और हर बच्चा आपकी जिम्मेदारी रहेगा।
- 1:18.447 गिद्ध ने कृतज्ञता से सहमति दी, और बरगद की पुरानी कोटर अब उसका छोटा-सा घर बन गई।
- 1:24.878 अगली सुबह पक्षी दाना खोजने निकले, तो बूढ़ा गिद्ध चौकन्ना होकर घोंसलों के पास बैठा रहा।
- 1:31.461 नन्हे बच्चे उसकी पुरानी वन-कथाएँ सुनते, और उसकी भारी आवाज से डरने के बदले मुस्कराते।
- 1:38.503 संध्या में लौटकर पक्षी अपने भोजन का थोड़ा भाग गिद्ध के लिए प्रेम से रख देते थे।
- 1:44.098 वह भी आँधी आने पर बच्चों को कोटर में छिपाता और ढीले घोंसलों को चोंच से सँभालता था।
- 1:50.139 कई महीने बीते, और पराए समझे गए उस वृद्ध पर पूरे पक्षी-समाज का विश्वास जम गया।
- 1:57.181 तभी एक अनजान बिल्ली वन में आई और घूमते-घूमते नदी किनारे वाले बरगद तक पहुँच गई।
- 2:04.223 बिल्ली दबे पाँव बरगद की जड़ों तक पहुँची, तो ऊपर बैठे बच्चे डरकर जोर-जोर से चिल्लाए।
- 2:11.264 उनकी पुकार सुनते ही गिद्ध कोटर से निकला और बिल्ली के सामने पंख फैलाकर अड़ गया।
- 2:17.306 इस पेड़ के पास तुम्हारा कोई काम नहीं। बच्चों की सुरक्षा के लिए तुरंत यहाँ से चली जाओ।
- 2:23.348 कृपया क्रोधित न हों। मैं पंजे पीछे रखकर सिर झुकाती हूँ; मेरी पूरी बात एक बार सुन लीजिए।
- 2:30.389 मैं किसी पक्षी को हानि नहीं दूँगी। अकेली यात्री हूँ और केवल पेड़ के नीचे आश्रय चाहती हूँ।
- 2:36.431 गिद्ध को उसकी बात पर पूरा भरोसा नहीं हुआ, इसलिए उसने स्पष्ट और कठोर शर्त रखी।
- 2:42.473 तुम केवल नीचे की जड़ों के पास रहोगी। किसी डाल, कोटर या घोंसले के निकट मत जाना।
- 2:49.514 आपकी हर शर्त स्वीकार है। मैं सीमा नहीं लाँघूँगी और शांति से यहीं अपना समय बिताऊँगी।
- 2:55.556 उस दिन से बिल्ली जड़ों के बीच रहने लगी और सबके सामने सदा बहुत शांत बनी रहती थी।
- 3:01.598 वह रोज गिद्ध को आदर से प्रणाम करती और उसकी समझदारी की प्रशंसा करते नहीं थकती थी।
- 3:07.639 मीठी बातों और आज्ञाकारी व्यवहार ने धीरे-धीरे बूढ़े गिद्ध की सावधानी कम कर दी।
- 3:13.681 कुछ दिनों बाद पक्षियों ने भी नीचे बैठी बिल्ली को देखना छोड़ दिया, मानो वह वहीं की हो।
- 3:19.723 एक दोपहर बड़े पक्षी दाना लेने गए, और बूढ़ा गिद्ध कोटर के पास सामान्य पहरे पर बैठा रहा।
- 3:26.764 खेलते हुए एक नन्हा बच्चा फुदककर पेड़ के नीचे आया, जहाँ बिल्ली छिपी देख रही थी।
- 3:32.806 उसे अकेला देखकर बिल्ली का असली लोभ तुरंत जाग उठा और उसके सारे मीठे वचन भूल गए।
- 3:39.237 किसी की नजर पड़ने से पहले वह बच्चे को झाड़ी की ओट में ले गई और उसे अपना भोजन बना लिया।
- 3:45.778 भोजन के बाद कुछ हड्डियाँ बरगद की जड़ों के बीच पड़ी रह गईं, और किसी ने उन्हें नहीं देखा।
- 3:52.82 शाम को बिल्ली पहले जैसी शांत बैठी रही, और कोटर के पास बैठे गिद्ध को घटना का पता भी न चला।
- 4:00.32 पहली सफलता के बाद बिल्ली रोज उस घड़ी की प्रतीक्षा करने लगी, जब पेड़ के बड़े पक्षी दूर हों।
- 4:07.361 अवसर मिलते ही वह किसी बच्चे को चुपचाप ले जाती, और बची हड्डियाँ जड़ों के बीच जमा होती रहीं।
- 4:14.403 धीरे-धीरे कई घोंसले सूने होने लगे, और लौटती माताओं को अपने प्यारे बच्चे नहीं मिले।
- 4:20.445 हमारे बच्चे लगातार गायब हो रहे हैं। क्या दिन में पेड़ के आसपास कोई अनजान प्राणी आया था?
- 4:27.486 मैंने किसी को डालों तक आते नहीं देखा। मेरी आँखें कमजोर हैं, मैं खोजने में साथ दूँगा।
- 4:33.528 पास बैठी बिल्ली ने चिंता का अभिनय किया, पर समझ गई कि उसका छल अब अधिक दिन नहीं छिपेगा।
- 4:40.57 उसी रात बिल्ली ने तय किया कि संदेह गहराने से पहले चुपचाप वन से निकल जाना ही ठीक था।
- 4:47.326 चाँद बादलों में छिपा, तो वह जड़ों से सरकी और बिना आहट किए दूर झाड़ियों में खो गई।
- 4:53.909 अगली सुबह एक और खाली घोंसला देखकर सारे पक्षियों का धैर्य और आशा अब टूटने लगे।
- 5:00.45 वे झुंड बनाकर नदी के मोड़, ऊँची डालियाँ और वन की हर परिचित पगडंडी खोजते रहे।
- 5:07.491 माता-पिता पुकारते रहे, लेकिन कहीं से बच्चों की चहचहाहट या उत्तर सुनाई नहीं दिया।
- 5:13.533 निराश पक्षियों ने अंत में बूढ़े गिद्ध से सब कुछ पूछने के लिए उसकी कोटर का रुख किया।
- 5:19.575 कोटर के पास पहुँचते ही एक पक्षी की नजर नीचे पड़ी, जहाँ छोटी हड्डियों का ढेर पड़ा था।
- 5:26.116 उस दृश्य ने सबको स्तब्ध कर दिया, और दुख ने उनके मन में एक ही पल में क्रोध भर दिया।
- 5:33.157 हड्डियाँ देखकर सबने उसी क्षण मान लिया कि बूढ़े गिद्ध ने ही बच्चों को अपना भोजन बनाया था।
- 5:39.74 शोक में पक्षियों की सूझबूझ खो गई, और वे बिना कुछ पूछे बूढ़े गिद्ध की ओर बढ़ने लगे।
- 5:46.124 अचानक उमड़ा झुंड देखकर बूढ़ा गिद्ध घबरा गया; उसे बिल्ली की करतूत का कोई ज्ञान नहीं था।
- 5:53.166 उधर बिल्ली पहले ही पेड़ छोड़ चुकी थी, इसलिए उसके किए की सच्चाई किसी के सामने नहीं आ सकी।
- 5:59.208 क्रोधित झुंड ने बूढ़े गिद्ध को घेरकर कठोर दंड दिया, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।
- 6:05.833 कमजोर वृद्ध अपनी रक्षा नहीं कर सका, और उसी बरगद पर उसका जीवन दुखद रूप से समाप्त हो गया।
- 6:13.874 बिल्ली वन से बहुत दूर निकल चुकी थी, इसलिए उसके छल का सच बताने वाला वहाँ कोई नहीं था।
- 6:19.916 जल्दबाजी में लिए निर्णय ने निर्दोष रखवाले को दंड दिया, जिसने महीनों बच्चों की सेवा की थी।
- 6:26.958 किसी अनजान व्यक्ति पर बिना परखे भरोसा करने का परिणाम अंत में स्वयं भुगतना पड़ता है।
- 6:32.999 कथा अच्छी लगी हो, तो चैनल सब्सक्राइब कीजिए और इसे अपने मित्रों से साझा कीजिए।