Shararti Gilhari Aur Chidiya | A Prank Goes Too Far
About this video
जिन चिड़ियों के घोंसले शानू ने उजाड़े, वे पेड़ छोड़ गईं। अब आग उसी पेड़ तक पहुँच रही है।
शानू गिलहरी चिड़ियों के घोंसलों को अपनी शरारत का हिस्सा बना लेती है। बार-बार घर उजड़ने से परेशान पक्षी पेड़ छोड़ देते हैं और वह अकेली रह जाती है। जब पास के खेत की आग पेड़ तक पहुँचती है, वही चिड़िया उसकी सहायता के लिए लौटती है।
इस हिंदी पशुकथा में दया, भरोसा और सच्ची माफी का अर्थ देखिए। किसी की मेहनत और घर का सम्मान करना जरूरी है। शानू अपनी गलती स्वीकार करती है और समझती है कि साथ रहने की खुशी जिम्मेदार व्यवहार से ही बनी रहती है।
Chapters
0:00 Life in the Banyan
0:22 Mischief Crosses a Line
0:49 The Missing Nest
4:36 Alone in the Tree
5:58 Kindness Returns
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Hindi transcript
The narration as spoken, from the caption track uploaded with this video.
- 0:04.088 घने जंगल के बीच एक विशाल बरगद था, जहाँ चंचल गिलहरी शानू और बहुत-सी चिड़ियाँ मिल-जुलकर रहती थीं।
- 0:13.13 सुबह होते ही डालियों पर मीठी चहचहाहट गूँजती, पत्तों के बीच घोंसले झूलते और पूरा पेड़ एक छोटे गाँव जैसा लगता।
- 0:22.171 शानू फुर्ती से तने पर दौड़ती और लंबी छलाँगें लगाती, पर सबका ध्यान पाने के लिए वह अक्सर शरारत की सीमा भूल जाती थी।
- 0:30.213 उसी बरगद पर एक नन्ही चिड़िया ने तिनके, सूखी घास और नरम पत्तियाँ जोड़कर बड़े जतन से अपना सुंदर घोंसला बनाया था।
- 0:40.255 एक दिन चिड़िया दाना लेने उड़ी, तो शानू की नजर उसके खाली घोंसले पर पड़ी और उसके मन में नई शरारत जाग उठी।
- 0:49.296 शानू ने इधर-उधर देखा, फिर दोनों पंजों से घोंसला उठाया और डाल से नीचे उतरते हुए अपनी हँसी मुश्किल से रोकी।
- 0:58.338 वह घोंसले को बरगद के पास फैले गेहूँ के खेत में ले गई, उसे बालियों के बीच रखा और चुपके से वापस लौट आई।
- 1:07.38 पेड़ पर पहुँचकर शानू पत्तों के पीछे छिप गई; उसे लगा कि सबकी उलझन देखकर खूब मजा आएगा और कोई नाराज नहीं होगा।
- 1:16.421 थोड़ी देर बाद चिड़िया लौटी, लेकिन जानी-पहचानी डाली खाली थी; वह बार-बार चक्कर लगाकर अपना घर खोजने लगी।
- 1:25.463 मेरा घोंसला कहाँ चला गया? मैंने तो इसे यहीं बनाया था; क्या किसी ने मेरे घर को कहीं और जाते देखा है?
- 1:32.505 चिड़िया ने ऊपर की टहनियाँ, तने की दरारें और आसपास की डालियाँ देखीं, पर उसके मेहनत से बनाए घर का कोई निशान नहीं मिला।
- 1:42.546 तभी एक पक्षी ने सच बताने का साहस किया; उसने शानू को घोंसला नीचे ले जाते देखा था और वह पड़ोसी की मदद करना चाहता था।
- 1:51.588 दुखी चिड़िया शानू के पास पहुँची और शांत स्वर में उससे पूछा कि क्या वह जानती है, उसका घोंसला आखिर कहाँ गया।
- 1:59.63 अरे, तुम्हारा घोंसला! मैंने तो उसे बरगद के पास वाले गेहूँ के खेत में देखा था; शायद वह खुद घूमने चला गया होगा।
- 2:07.671 इतना कहकर शानू जोर से हँसी और झटपट ऊँची डाली पर चढ़ गई; उसकी हँसी सुनकर चिड़िया सारी बात समझ गई।
- 2:16.713 चिड़िया खेत में पहुँची और बालियों के बीच अपना घोंसला पा गई, पर अब उसे पुराने बरगद की डाली सुरक्षित नहीं लग रही थी।
- 2:25.755 वह घोंसला देखकर उदास हुई; तिनके वहीं थे, लेकिन अपने पड़ोसी पर किया गया उसका भरोसा जैसे कहीं खो गया था।
- 2:34.796 घर केवल तिनकों से नहीं बनता, शानू; उसमें मेहनत, अपनापन और भरोसा भी होता है, इसलिए किसी का घर खिलौना नहीं होता।
- 2:43.838 चिड़िया ने पास के दूसरे पेड़ पर नया घोंसला बनाया, और साथी पक्षियों ने तिनके लाकर उसकी मेहनत जल्दी पूरी करा दी।
- 2:53.88 दूर बैठी शानू ने यह सब देखा, फिर भी उसने अपनी गलती नहीं मानी; उसे अब भी वह घटना बस एक मजेदार खेल लग रही थी।
- 3:03.921 कुछ दिन बाद शानू ने फिर शरारत की और अलग-अलग डालियों पर बने कई घोंसले नीचे गिरा दिए, जिससे सारे पक्षी घबरा गए।
- 3:12.963 किसी की कई दिनों की मेहनत बिखर गई, किसी को फिर से तिनके जुटाने पड़े; अब शानू की शैतानी किसी को हँसी वाली बात नहीं लगी।
- 3:22.005 सभी चिड़ियाँ एक डाल पर इकट्ठी हुईं, क्योंकि वे अपने घरों को बार-बार उजड़ते नहीं देख सकती थीं और सुरक्षित जगह चाहती थीं।
- 3:31.046 हम इस बरगद से दूर दूसरे पेड़ पर चलेंगे, जहाँ हमारे घोंसले सुरक्षित रहें; साथ रहेंगे तो नया घर फिर बना लेंगे।
- 3:40.088 उसी शाम पक्षियों का झुंड उड़ गया; चहचहाहट से भरा बरगद अचानक शांत हुआ और हर डाली सूनी दिखाई देने लगी।
- 3:50.13 अब पूरे बरगद पर शानू अकेली रहती थी; न कोई उसकी छलाँग देखकर मुस्कराता, न कोई सुबह उसे आवाज देकर जगाता था।
- 3:59.171 वह एक डाली से दूसरी डाली तक दौड़ी और पुराने खेल दोहराए, मगर खाली पेड़ में केवल पत्तों की सरसराहट ने उसका साथ दिया।
- 4:09.213 शाम को खाली घोंसलों की जगहें देखकर शानू को पहली बार समझ आया कि उसकी शरारत ने सबको उससे कितना दूर कर दिया था।
- 4:18.255 उसके मन में पछतावा तो जागा, पर वह किसी से क्षमा माँगने नहीं गई; झिझक और अभिमान ने उसके कदम रोक लिए।
- 4:27.296 उधर बरगद के नीचे गेहूँ पककर सुनहरा हो चुका था, और गर्म दिन की सूखी हवा खेत तथा पेड़ के बीच बह रही थी।
- 4:36.338 एक दोपहर गेहूँ के खेत में अचानक आग लग गई; सूखी बालियों के सहारे लाल लपटें बहुत तेजी से बरगद की ओर बढ़ने लगीं।
- 4:46.38 देखते-देखते आग ने पेड़ के चारों ओर घेरा बना लिया, धुआँ ऊपर चढ़ा और तने के पास उतरने का रास्ता बंद हो गया।
- 4:55.421 शानू ने नीचे आने की कोशिश की, पर गर्मी से पीछे हटना पड़ा; अब उसे समझ आया कि अकेले होने का खतरा कितना बड़ा है।
- 5:04.463 जब निचली टहनियों ने आग पकड़ी, तो घबराई शानू जान बचाने के लिए बरगद की सबसे ऊँची और पतली डाली पर जा बैठी।
- 5:13.505 कोई मेरी सहायता करो! मैंने सबको दुख देकर दूर भेज दिया, पर आज मुझे अपनी गलती सुधारने का बस एक अवसर चाहिए।
- 5:21.546 दूसरे पेड़ से चिड़िया ने धुएँ का बादल देखा; पुराना दुख याद होने पर भी वह किसी जीव को संकट में छोड़ना नहीं चाहती थी।
- 5:30.588 उसने साथी पक्षियों को पुकारा और सब बरगद की ओर उड़े; उनका साथ देखकर डरी हुई शानू के मन में आशा की किरण जागी।
- 5:40.63 शानू, घबराना मत और बिल्कुल स्थिर रहना; मैं तुम्हें पंजों से सुरक्षित पकड़कर उस दूसरे पेड़ तक ले जाऊँगी।
- 5:48.671 चिड़िया ने शानू को मजबूती से थामा, पंख फैलाए और धुएँ से दूर उड़ चली, जबकि बाकी पक्षी उसे सही दिशा दिखाते रहे।
- 5:57.713 कुछ क्षण बाद वह शानू को सुरक्षित दूसरे पेड़ की चौड़ी डाली पर ले आई, जहाँ बरगद छोड़कर गई सारी चिड़ियाँ रहती थीं।
- 6:06.755 शानू ने उन्हीं पक्षियों को देखा जिनके घोंसले उसने गिराए थे; शर्म से उसकी आँखें झुक गईं और उसका चंचल चेहरा गंभीर हो गया।
- 6:16.796 मुझे क्षमा कर दो। मैंने तुम्हारी मेहनत को खेल समझा, फिर भी तुमने मेरी जान बचाई; अब मैं कभी किसी को परेशान नहीं करूँगी।
- 6:25.838 गलती मानकर उसे सुधारना ही सच्ची समझदारी है। यदि तुम सबके घरों का सम्मान करोगी, तो हम फिर मिलकर सुख से रहेंगे।
- 6:34.88 उस दिन शानू ने जाना कि समाज में हर किसी की जरूरत पड़ती है; इसलिए मिल-जुलकर रहना, दया करना और एक-दूसरे की सहायता करना चाहिए।