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Manhoos Kaun | Tenali Rama and the Unlucky Face

Published 2026-08-113:50Full story

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About this video

तेनालीराम की “मनहूस कौन” कथा में लोग चेलाराम को अपशकुन समझते हैं। राजा इस बात को परखना चाहते हैं, लेकिन दिन भर भोजन में बाधाएँ आने पर वही अंधविश्वास मान बैठते हैं। चेलाराम पर कठोर सज़ा का खतरा आता है तो तेनालीराम एक छोटे से कागज़ पर सवाल भेजते हैं। मनहूस कौन की इस हिंदी कथा में देखिए कि दोष लगाने का वही तर्क राजा की ओर लौटते ही कैसे बदल जाता है। कहानी अफवाह, संयोग और न्याय के बीच फर्क समझाती है। किसी का चेहरा नहीं, बिना सोचे किया गया फैसला असली समस्या बनता है। Chapters 0:00 The Man Called Unlucky 0:38 The King Investigates 1:20 A Day Without Food 2:04 A Clever Slip of Paper 2:42 Who Was Unlucky KiddoTunes Studio पर हिंदी कहानियाँ, लोककथाएँ और पौराणिक कथारूपांतरण देखें। चैनल: https://www.youtube.com/@KiddoTunesStudio Instagram: https://www.instagram.com/kiddotunesstudio/ Facebook: https://www.facebook.com/profile.php?id=61586698360805 #ManhoosKaun #HindiKahani #KiddoTunesStudio

Hindi transcript

The narration as spoken, from the caption track uploaded with this video.

  1. 0:04.121 यह तेनाली राम की एक बहुत मजेदार और बुद्धिमानी से भरी कहानी है।
  2. 0:09.163 विजयनगर के राज्य में चेलाराम नाम के एक साधारण व्यक्ति को लेकर एक अजीब बात फैल गई।
  3. 0:15.204 लोग कहते थे कि सुबह-सुबह जो चेलाराम का मुँह देख ले, उसे दिन भर भोजन नहीं मिलता।
  4. 0:21.246 इसी डर से नगर के लोग सुबह के समय चेलाराम का मुँह देखना नहीं चाहते थे।
  5. 0:26.288 बेचारा चेलाराम इस अंधविश्वास से बहुत परेशान और दुखी रहने लगा था।
  6. 0:31.329 धीरे-धीरे यह अजीब खबर राजा कृष्णदेव राय के दरबार तक भी जा पहुँची।
  7. 0:37.371 यह सब केवल अंधविश्वास है, ऐसे किसी के मुँह से भला क्या होता है।
  8. 0:41.413 मैं इस बात की सच्चाई स्वयं जानना चाहता हूँ, चेलाराम को महल में बुलाओ।
  9. 0:46.454 राजा ने चेलाराम को कुछ दिन अपने विश्राम कक्ष के पास एक कमरे में रखा।
  10. 0:51.496 एक सुबह राजा नींद से उठा ही था कि उसकी नज़र खिड़की से बाहर गई।
  11. 0:56.538 उसने देखा कि चेलाराम अपने कमरे में शांति से योग कर रहा था।
  12. 1:00.579 राजा बिना कुछ कहे अपनी रोज़ की दिनचर्या की ओर बढ़ गया।
  13. 1:04.621 थोड़ी देर बाद जब राजा नाश्ते के लिए बैठा, तो उसने एक अजीब बात देखी।
  14. 1:09.663 उसके स्वादिष्ट नाश्ते की थाली में एक मक्खी आकर गिर पड़ी थी।
  15. 1:13.704 राजा ने गुस्से में रसोइयों को बुलाया और बिना खाए ही उठ गया।
  16. 1:17.746 दोपहर को राजा भोजन के लिए बैठा ही था कि एक दूत दौड़ता हुआ आया।
  17. 1:22.788 दूत ने बताया कि सीमा पर शत्रु की सेना हमला करने वाली है।
  18. 1:26.829 यह सुनते ही राजा भोजन छोड़कर अपने सैनिकों को आदेश देने चला गया।
  19. 1:31.871 इसी भाग-दौड़ में दिन कब बीत गया, राजा को पता ही नहीं चला।
  20. 1:36.913 देखते-देखते शाम हो गई और राजा पूरे दिन भूखा ही रह गया।
  21. 1:40.954 रात को विश्राम करते समय अचानक राजा को एक पुरानी बात याद आई।
  22. 1:45.996 आज सुबह तो सबसे पहले मैंने उसी मनहूस चेलाराम का मुँह देखा था।
  23. 1:51.038 तभी तो मुझे पूरे दिन भोजन नसीब नहीं हुआ, यह सब उसी का दोष है।
  24. 1:55.079 अगली सुबह क्रोध में राजा ने चेलाराम को कड़ी सजा देने का आदेश सुना दिया।
  25. 2:00.121 यह दुखद खबर सुनते ही चेलाराम की पत्नी घबराकर रोने लगी।
  26. 2:04.163 वह दौड़ती हुई सीधे बुद्धिमान तेनाली राम के घर जा पहुँची।
  27. 2:08.204 उसने हाथ जोड़कर तेनाली से अपने पति को बचाने की विनती की।
  28. 2:13.246 तुम बिलकुल चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा, मैं हूँ ना।
  29. 2:17.288 तेनाली राम ने एक छोटी सी पर्ची पर कुछ लिखकर उसे संभालकर रखा।
  30. 2:22.329 अगली सुबह बुद्धिमान तेनाली राम बड़ी सावधानी से चुपके-चुपके चेलाराम के पास जा पहुँचे।
  31. 2:28.371 तेनाली ने वह पर्ची चेलाराम को दी और उसके कान में कुछ फुसफुसाया।
  32. 2:33.413 चेलाराम ने धीरे से सिर हिलाया और वह गुप्त पर्ची अपने पास रख ली।
  33. 2:38.454 तभी राजा सजा सुनाने के लिए दरबार में आकर बैठ गया।
  34. 2:42.496 चेलाराम, सजा से पहले बताओ, तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है।
  35. 2:46.538 महाराज, मेरी बस इतनी विनती है कि आप यह पर्ची एक बार पढ़ लें।
  36. 2:51.579 राजा ने उत्सुकता से वह छोटी सी मुड़ी हुई पर्ची खोलकर पढ़नी शुरू की।
  37. 2:56.621 पर्ची में तेनाली राम के लिखे चतुर शब्द कुछ इस प्रकार थे।
  38. 3:00.663 लोग कहते हैं कि मेरा मुँह देखने से दिन भर भोजन नहीं मिलता।
  39. 3:04.704 पर जो मेरा मुँह देखे उसे सजा मिलती है, तो मनहूस कौन है, मैं या राजा।
  40. 3:11.746 यह पढ़ते ही राजा चौंक गया और उसका सारा क्रोध शांत हो गया।
  41. 3:16.788 उसने तुरंत चेलाराम की सजा रोक दी और उसे आदर के साथ विदा किया।
  42. 3:21.829 राजा समझ गया कि ऐसी बुद्धिमानी सिर्फ तेनाली राम ही सिखा सकते हैं।
  43. 3:26.871 इस तरह तेनाली की चतुराई ने एक बेकसूर इंसान की जान बचा ली।
  44. 3:31.913 इस कहानी का संदेश यही है कि अंधविश्वास नहीं, समझदारी ही सच्ची ताकत है।
  45. 3:37.954 अगर यह कहानी अच्छी लगी हो, तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब ज़रूर करें।

English translation

Translated automatically from the Hindi captions by gemini-3.1-pro-preview on 2026-08-15. It has not been reviewed by a person and may differ from the narration.

This is a very fun and clever story about Tenali Rama. In the kingdom of Vijayanagara, a strange rumor spread about an ordinary man named Chelaram. People used to say that whoever saw Chelaram's face early in the morning would not get food for the whole day. Out of this fear, the people of the city did not want to see Chelaram's face in the morning. Poor Chelaram became very troubled and sad because of this superstition. Gradually, this strange news reached the court of King Krishnadevaraya.

"This is all just superstition. What could possibly happen from seeing someone's face? I want to know the truth of this matter myself. Call Chelaram to the palace."

The king kept Chelaram in a room near his resting chamber for a few days. One morning, the king had just woken up from his sleep when he looked out the window. He saw that Chelaram was peacefully doing yoga in his room. The king, without saying anything, went about his daily routine.

A little while later, when the king sat down for breakfast, he saw a strange thing. A fly had fallen into his plate of delicious breakfast. The king angrily called the cooks and got up without eating. In the afternoon, the king had just sat down for his meal when a messenger came running. The messenger informed him that the enemy army was about to attack the border. Hearing this, the king left his meal and went to give orders to his soldiers. In all this rushing around, the king did not even realize