Gadhon Ko Praman | Tenali Rama Bows to Two Donkeys
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तथाचार्य नाम के एक शिक्षक सामान्य लोगों को देखकर अपना चेहरा ढक लेते हैं। उनका अंधविश्वास और घमंड लोगों को दुखी करता है। राजा के साथ रास्ते में चलते तेनालीराम कुछ गधों को बड़े आदर से प्रणाम करके सबका ध्यान खींचते हैं।
जब उनसे कारण पूछा जाता है, वे गुरु की अपनी मान्यता को एक व्यंग्यपूर्ण उत्तर में लौटा देते हैं। इस हिंदी कथा में हँसी के माध्यम से भेदभाव और झूठी श्रेष्ठता पर सवाल उठता है। तेनालीराम की चतुर तर्क-युक्ति गुरु को अपने व्यवहार पर सोचने के लिए मजबूर करती है।
Chapters
0:00 The Teacher Who Hid
0:25 Why He Covered His Face
0:56 Tenali Makes a Plan
1:26 Bowing to the Donkeys
1:56 The Lesson
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Hindi transcript
The narration as spoken, from the caption track uploaded with this video.
- 0:04.121 यह तेनाली राम की एक बहुत मजेदार और बुद्धिमानी से भरी कहानी है।
- 0:08.579 राजा कृष्णदेव राय के राज्य में तथाचार्य नाम का एक रूढ़िवादी शिक्षक रहता था।
- 0:14.579 वह खुद को सबसे ऊँचा समझता और बाकी सब लोगों को बहुत छोटा मानता था।
- 0:20.579 जब भी कोई साधारण व्यक्ति उसके पास से गुज़रता, वह झट से अपना मुँह ढक लेता।
- 0:26.579 उसके इस घमंडी बर्ताव से दरबार के सभी मंत्री और लोग बहुत परेशान हो चुके थे।
- 0:32.579 एक दिन सब लोगों ने राजा के सबसे बुद्धिमान मंत्री तेनाली राम को यह बात बताई।
- 0:38.579 सारी बात सुनकर तेनाली राम तथाचार्य से मिलने सीधे उसके घर पहुँच गए।
- 0:44.579 तेनाली राम को आते देखते ही तथाचार्य ने तुरंत अपना मुँह कपड़े से ढक लिया।
- 0:50.579 आचार्य जी, आख़िर आप मुझे देखकर इस तरह अपना मुँह क्यों ढक लेते हैं?
- 0:55.538 अगर मैं किसी साधारण व्यक्ति का मुँह देख लूँ, तो मैं पाप का भागीदार बन जाऊँगा।
- 1:01.538 ऐसे पाप के कारण अगले जन्म में मुझे गधा बनना पड़ेगा, इसलिए मैं मुँह ढक लेता हूँ।
- 1:09.538 तेनाली राम ने तथाचार्य की यह अनोखी बात अपने मन में अच्छी तरह गाँठ बाँध ली।
- 1:15.538 कुछ दिनों बाद राजा कृष्णदेव राय अपने मंत्रियों के साथ राज्य घूमने निकले।
- 1:21.538 पूरे दिन नगर का हाल देखकर शाम को सब लोग महल की ओर वापस लौट रहे थे।
- 1:27.538 रास्ते में अचानक राजा की मुलाकात उसी घमंडी शिक्षक तथाचार्य से हो गई।
- 1:33.538 राजा प्रेम से तथाचार्य का हाल-चाल पूछ ही रहे थे कि तभी कुछ गधे वहाँ आ गए।
- 1:39.538 गधों को देखते ही तेनाली राम तेज़ी से दौड़कर उनके पास जा पहुँचे।
- 1:44.163 फिर वे बड़े आदर के साथ झुक-झुककर उन गधों को बार-बार प्रणाम करने लगे।
- 1:50.163 तेनाली राम का यह अनोखा बर्ताव देखकर राजा और सभी मंत्री हैरान रह गए।
- 1:56.163 तेनाली, भला तुम इन गधों को इतने आदर से बार-बार प्रणाम क्यों कर रहे हो?
- 2:02.163 महाराज, मैं तो आदरणीय आचार्य जी के पूर्वजों को सम्मान दे रहा हूँ।
- 2:07.038 सुना है कि हमारे जैसे लोगों का मुँह देखकर ही ये सब अगले जन्म में गधे बने हैं।
- 2:13.038 तेनाली राम की यह चतुर बात सुनकर तथाचार्य राजा के सामने बहुत लज्जित हो गए।
- 2:19.038 उन्हें समझ आ गया कि उनका घमंड और अंधविश्वास दोनों ही पूरी तरह गलत थे।
- 2:25.038 उसी दिन से तथाचार्य ने किसी के भी सामने अपना मुँह ढकना हमेशा के लिए छोड़ दिया।
- 2:31.038 इस कहानी का संदेश यही है कि घमंड और अंधविश्वास को बुद्धि हमेशा हरा देती है।
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